एक अनजान भाभी से ट्रेन में लंड चुसवाया

लंड सकिंग सेक्स स्टोरी लोकल ट्रेन में मिली एक भाभी के साथ चलती गाड़ी में अश्लील कारनामों की है. ट्रेन लगभग खाली थी तो हमें मौक़ा मिल गया.

दोस्तो, मेरा नाम रोहित है और मैं इस वक़्त मुंबई (मीरा रोड ईस्ट) में रहता हूँ. सब भाभियो और दीदियो को मेरे खड़े लंड से सलाम.

मैं चुदाई कहानी डॉट कॉम का रेग्युलर पाठक हूँ और यह मेरी बहुत मनपसंद साइट है.
इस साइट की सभी कहानियां पढ़ कर मुझे बहुत मज़ा आता है.
मुझे भाई बहन की चुदाई, टीचर स्टूडेंट चुदाई, नौकर और मालकिन चुदाई जैसे विषयों पर प्रकाशित सेक्स कहानियां बहुत पसंद आती हैं.

मैं अपनी एक सच्ची घटना आप सब लोगों के साथ शेयर करने जा रहा हूँ. मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को यह लंड सकिंग सेक्स स्टोरी पसंद आएगी.

मेरे परिवार में एक बड़ा भाई, मैं और दो छोटी बहनों के साथ मेरी मम्मी रहती हैं.
मेरे पापा की बचपन में एक कार एक्सिडेंट में मृत्यु हो गयी थी.

यह सेक्स कहानी तब की है जब मैं दिल्ली में रहता था.

मेरी मम्मी और दोनों छोटी बहनें हरियाणा के एक शहर रोहतक में रहती थीं और मेरे बड़ा भाई मुंबई में एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था.

उन दिनों मैं दिल्ली की एक एड एजेन्सी में जॉब करता था और मेरा ऑफिस बाराखंबा रोड, कनाट प्लेस में था.

वैसे तो मैं दिल्ली में ही गोविंदपुरी में रहता था लेकिन उन दिनों पैसे के कमी की वजह से मुझे गोविन्दपुरी वाला कमरा खाली करना पड़ा.
अब मुझे रोहतक से डेली अप डाउन करना पड़ता था.

रोहतक रेलवे स्टेशन से एक ट्रेन सुबह 6.25 पर चलती थी और मैं रोज़ इसी ट्रेन से ट्रैवेल करता था.
मैं शिवाजी ब्रिज पर उतर जाता था.
वहां से मेरा ऑफिस चंद क़दमों की दूरी पर ही था.

ये दो अक्टूबर की बात है. हल्की सर्दी के दिन थे.
आपको तो पता ही है कि ठंड के दिनों में सुबह सुबह हर लड़के का लंड टाइट होता है जिसे मॉर्निंग इरेक्शन कहते हैं.
उस समय बस दिल करता है कि कोई माल मिल जाए तो उसकी चुत में लंड पेल कर धकाधक चुदाई करके खाली कर दूँ.

मैं बचपन से बड़ा हॉर्नी हूँ. सुबह सुबह तो मैं अपनी छोटी बहन को भी देखता हूँ, तो मेरा लंड पूरा खड़ा हो जाता है.

मैं जब भी घर में होता था, तो बहुत छोटी से निक्कर पहनता था और अन्दर कच्छा भी नहीं पहनता था.
जब भी मेरी छोटी बहन मेरे आस पास आती थी, तो मैं निक्कर के अन्दर हाथ डाल कर अपना लंड सहलाने लगता था.

इससे मेरी निक्कर में टेंट बन जाता था और मेरी बहन मेरे खड़े लंड को छुप छुप कर देखती थी. मेरा दिल करता था कि वहीं अपनी निक्कर उतार दूँ और अपने लंड को अपनी बहन के मुँह में डाल कर सारा माल उसके मुँह में निकल दूँ.
मगर मैं ऐसी हिम्मत कभी नहीं जुटा पाया.

खैर … मैं अपनी बहन के बारे में फिर किसी और दिन बात करूंगा, फिलहाल मैं अपनी स्टोरी पर वापस आता हूँ.

मैं उस दिन सुबह सुबह घर से निकल कर रोहतक रेलवे स्टेशन पर आ गया.
दोस्तो, पिछली रात बारिश हुई थी और बड़ी ठंड थी और धुंध भी बहुत ज़्यादा थी.

ट्रेन अपने राईट टाइम पर आ गयी और मैं अपनी पसंदीदा विंडो सीट पर जाकर बैठ गया.
मेरे सामने वाली सीट खाली थी.

दिल कर रहा था कि कोई आंटी, भाभी या दीदी आ जाए और मुझे अपनी बांहों में भर के मुझे अपनी गोद में बिठा ले तो मज़ा आ जाए.

यह सोचते सोचते ही मेरा लंड मेरी पैंट के अन्दर खड़ा हो गया.

उस दिन ट्रेन लगभग खाली थी. दो चार लोग ही थे और वो भी मेरी सीट से बहुत दूर थे.

ट्रेन में अंधेरा भी बहुत था. मेरे आस-पास की सब सीट्स खाली पड़ी थीं.

तभी अचानक एक 30-35 साल की औरत आई और मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गयी.
मैंने अपने दोनों पैर सामने वाली सीट पर रखे हुए थे तो वो एकदम मेरे पैर के पास बैठ गयी.

मुझे डर लगा कि यदि ग़लती से मेरे पैर उसकी जांघों को टच हो गए तो वो गुस्सा हो जाएगी.
इसलिए मैंने ना चाहते भी अपने पैर नीचे कर लिए.

दोस्तो, उसका रंग काला जरूर था, पर देखने में बहुत सेक्सी लग रही थी.

उसने हरे रंग का सूट सलवार पहन रखा था. गले में हरा दुपट्टा और हाथों में हरी चूड़ियां.
वो एक शादी-शुदा माल थी और उसका बदन पूरा भरा-भरा और गदराया था.

उसके मम्मों का साइज़ मेरे जैसे लड़के के लिए एकदम परफेक्ट था.
वो थोड़ी सी मोटी थी.
अब आप लोग समझ ही गए होंगे कि वो एकदम चोदने लायक माल थी.

उससे बात करने की मेरी तो हिम्मत ही नहीं हो रही थी.

थोड़ी देर में उसने खुद ही बात छेड़ दी- आज ट्रेन इतनी खाली खाली क्यों हैं!
मैं मन ही मन खुश होते हुए बोला- पता नहीं.

वो- अच्छा, आज दो अक्टूबर हैं, सरकारी छुट्टी है … शायद इसलिए.
मैं- हां शायद.

अब मेरी हिम्मत बढ़ गयी, मैं थोड़ा सा खुश हो गया.
मैंने बात करते करते 2-3 बार उसकी चुचियों को देखा तो पाया कि वो मेरी तरफ ही देख रही थी.

एक बार को तो मैं डर गया कि अब ये चिल्लाएगी, पर उसने कुछ नहीं कहा.
वो इधर उधर की बातें करने में लगी रही.

मैं बहुत खुश हुआ कि चलो इसको कुछ नहीं हुआ.

अब मैं भी उससे इधर उधर की बातें करने लगा और मेरे लंड पैंट के अन्दर झटके पर झटके मार रहा था.
शायद लंड भी खुश हो गया था कि आज इसकी चुत में घुसने को मिल जाएगा.

तभी ट्रेन ने सीटी बजाई और ट्रेन चलने लगी.

मैं- आपका नाम क्या है?
वो- निशा, और आपका?

मैं- रोहित.
निशा- ओके आप क्या करते हो?

मैंने बताया, तो बोली- आज दो अक्टूबर को भी छुट्टी नहीं है?
मैंने कहा- है तो … पर काम करने से ओवर टाइम का पैसा मिल जाता है. इसलिए जा रहा हूँ.

वो बोली- हम्म … ये तो अच्छी बात है.

फिर मैंने हिम्मत जुटा कर उससे पूछा- अगर आप बुरा ना मानो तो मैं अपने पैर आपकी सीट पर रख लूं.
उसने हंसते हुए कहा- हां हां, इसमें पूछने की क्या बात है, रख लो.

दोस्तो, उसकी इस बात से मेरे लंड ने इतनी जोर का झटका मारा कि मुझे लगा कि मेरा पानी अभी निकल जाएगा.
मैंने एक मिनट भी वेस्ट किए बिना अपने दोनों पैर सामने की सीट पर रख दिए.

अब मैं उससे बड़े ही आत्मविश्वास के साथ बातें करने लगा.
वो भी खुद ही रेस्पॉन्स दे रही थी.

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एक दो बार ऐसा हुआ कि ट्रेन के चलने से उसका और मेरा बदन पूरा हिल रहा था तो बात करते करते उसकी टांग मेरे पैरों से टच कर गयी.

आहह क्या मज़ा था … उसकी नर्म नर्म जांघों का!
उसकी जांघ का स्पर्श पाकर ही जन्नत का मज़ा आ गया था.

फिर भी मैंने डर कर अपने पैर सिकोड़ लिए और एक के ऊपर एक करके पैर रख लिए.

उसने बात करना जारी रखा. थोड़ी देर मैं वो कुछ और इधर को सरक आई और मेरे पैरों के साथ सट कर बैठ गयी.

अब तो मेरा रहा सहा डर भी जाता रहा और मैंने अपने पैर उसकी जांघों पर पूरे चिपका दिए.
मैं पैंट के ऊपर से लंड को सहलाने लगा और उससे बातें करने लगा.

उसने भी मेरी हरकतों को देख लिया और हल्के से मुस्करा दी.
मैंने हिम्मत करके उसे दिखाते हुए अपनी पैंट की ज़िप खोल दी.

उसने एक दो बार तो अपनी नज़रें फेर लीं.
पर शायद वो अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पा रही थी इसलिए अंतत: वो पूरी बेशर्म होकर मेरे लंड को देखने लगी.

मैं लगातार लंड सहला रहा था.

अब वो बात तो मुझसे कर रही थी पर उसकी आंखें मेरे लंड को देख रही थीं जो मेरी चड्डी के अन्दर था.

मेरी हाइट 5 फुट 4 इंच की है, बदन स्लिम ट्रिम है. मेरी हाइट को देख कर कोई नहीं कह सकता कि मेरा लंड 6 इंच का हो सकता है.

फिर मैंने अपने लंड को सहलाते सहलाते ही अपने दाएं पैर से उसकी एक जांघ को सहलाना शुरू कर दिया.
उसके मुँह से हल्की सी, मीठी सिसकारी निकल गयी.

उसकी सिसकारी सुन कर मुझमें और भी जोश आ गया.
अब मैंने पूरी हिम्मत के साथ अपने पैर को उसकी जांघ पर रख दिया.

मैंने महसूस किया कि उसकी सांसें भारी हो रही हैं क्योंकि उसके दूध ऊपर नीचे होने लगे थे.

फिर मैंने उससे पूछा- क्या मैं आपके साथ, आपकी सीट पर बैठ सकता हूँ.
उसने थोड़ी बनावटी हैरानी से कहा- क्यों मेरे पास क्यों बैठना है?

पहले तो मेरी गांड ही फट गयी, मेरा लंड जो एकदम टाइट था, ढीला पड़ने लगा.

उसने यह सब देखा, तो वो अचानक से मुँह दबाकर हंसने लगी.
मैं समझ गया कि वो मेरे मज़े ले रही है.

बस फिर क्या था मैं झट से अपनी सीट से उठ कर उसकी सीट पर, उसके साथ एकदम चिपक कर बैठ गया.

पर मुझे समझ नहीं आ रहा थी कि क्या बात करूं.
दिल तो कर रहा थी कि बात की मां की चुत, सीधा मम्मे पकड़ कर चूसना शुरू कर दूँ, जो होगा देखा जाएगा.

मैं अभी ये सब सोच ही रहा था कि उसने कहा- मेरी चूड़ियां कैसी हैं, कल ही मार्केट से खरीदी हैं.
बस अब मैंने झट से उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- तुम्हारी चूड़ियां बहुत सुंदर हैं, बिल्कुल तुम्हारी तरह.

ये कहते हुए मैं उसके हाथों को सहलाने लगा.
उसे भी मज़ा आने लगा तो वो मुँह से मीठी मीठी सिसकारियां निकालने लगी.
उसकी आंखें बंद होने लगीं तो मैं समझ गया कि वो मज़ा लेने और देने के लिए रेडी है.

फिर क्या था मैंने एक झटके से अपने हाथ से उसकी एक चूची को पकड़ा और अपने दूसरे हाथ को उसके कंधे के नीचे से ले जाकर उसके दूसरे बूब को पकड़ लिया.

वो कुछ नहीं बोली तो मैं धीरे धीरे से दबाने लगा.

उसने अपनी आंखें खोल दीं और थोड़ी सी घबराहट के साथ बोली- यह क्या कर रहे हो, कोई देख लेगा.

मैंने कहा- अरे भाभी, मेरी जान कोई नहीं देखेगा … और देख भी लेगा तो देखने दो, इसी में तो मज़ा है.

यह कहते हुए मैंने उसकी कुर्ती, जो थोड़ी खुले गले वाली थी, उसमें अपने दोनों हाथ डाल दिए और ब्रा के ऊपर से ही उसके दोनों मम्मों को सहलाने लगा.

अब मैं रुकने वाला या पीछे मुड़ने वाला नहीं था.
उसने मीठी सिसकारियों के बीच कहा- रोहित, तुम बिल्कुल पागल हो. ट्रेन में इतने सारे लोग हैं, कोई देख लेगा तो प्राब्लम हो जाएगी.

मैंने कहा- अब जो होगा देखा जाएगा. तुम भी अपने नर्म नर्म हाथों से मेरा लंड सहलाओ.

पहले तो वो थोड़ा हिचकिचाई तो मैंने ज़बरदस्ती उसका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.

वो मेरे लंड को चड्डी के ऊपर से फील करके हड़बड़ा गई और अपना हाथ वापस खींचने लगी.

मैंने फिर से उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया.
इस बार उसने अपना हाथ वापस नहीं खींचा और वो धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाने लगी.

फिर उसने मेरी पैंट के बेल्ट और हुक को खोल दिया और अपने हाथ को मेरी पैंट के अन्दर डाल कर मेरे लंड को आगे पीछे करने लगी.
भाभी मेरे लंड को ऐसे आगे पीछे कर रही थी, जैसे लंड चुत के अन्दर आगे पीछे होता है.

अहह क्या मज़ा आ रहा था.

मैंने उसकी कुर्ती को ऊपर कर दिया और ब्रा को ऊपर खींच दिया.
मैं उसके मम्मों को एक एक करके चूसने लगा.

कभी मैं एक दूध को पीता और दूसरे को हाथों से बड़ी बेरहमी से मसलता, उसकी निप्पल को चुटकी काट देता, तो कभी दूसरे दूध को मुँह में ले लेता और दूसरे वाले को अपनी हथेली से भींच देता.

‘आआआहह … आंह रोहित …’
उसकी सिसकारियां बढ़ती जा रही थीं. वो और जोर से मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ने लगी और दबाने लगी.

कुछ ही देर में मुझे लगा कि लंड का पानी छूट जाएगा.

भाभी बहुत बेकाबू होती जा रही थी.

अचानक उसने मेरी कच्छी के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरे लंड को बुरे तरह से अपनी मुट्ठी में भींचने और कसके पकड़ने लगी.
उसकी सांसें बहुत भारी हो गयी थीं और उसकी चुचियां जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगी थीं.
उसके होंठ सूखने लगे. वो अपने जीभ से अपने होंठों को चाटने लगी.

मैंने उसके दूध से मुँह हटाया और उसके होंठों के ऊपर अपने होंठों रख कर उसके होंठों को चूसने लगा.

आआ अहह … कितने नर्म और रस भरे होंठ थे उसके.

वो पागल होने लगी और उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी.
मैं उसकी जीभ को चूसने लगा.
उसने मुझे बहुत कसके पकड़ लिया और बुरे तरीके से मेरे होंठों को चूसने लगी.

मैंने अपना एक हाथ उसके सलवार में डाला और कच्छी के ऊपर से ही उसकी चुत को सहलाने लगा.

‘आआ आअहह इश्ह ओह रोहित आई लव यू बेबी.’

वो खुद अपनी चुत को ऐसे ऊपर नीचे करने लगी, जैसे मेरी उंगली को अन्दर लेना चाहती हो.

यह देख कर मेरा जोश और बढ़ गया और मैंने अपने एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल दिया और अपनी एक उंगली उसकी चुत में घुसेड़ दी.

‘यसस्स् आंह यसस्स रोहित … ऐसे ही आआह्ह्ह रोहित मेरी ज़ान … आंह प्लीज़ और तेज और तेज और तेज्ज …’
वो एकदम से तड़प उठी.

मैं और भी जोश में भरके उसके मम्मों को पागलों की तरह चूसने लगा, दबाने लगा, बड़ी बेरहमी से मसलने लगा.

तभी उसका पूरा बदन अकड़ने लगा और उसकी चुत ने अपना गर्म गर्म पानी मेरी उंगली पर छोड़ दिया.

फिर वो जोर जोर से हांफने लगी और शांत हो गयी.
उसके होंठों पर एक संतुष्ट भाभी वाली स्माइल थी.

अब मैं खड़ा हो गया और मेरा लंड उसके मुँह के एकदम सामने था.
मैंने कहा कि प्लीज़ इससे चूसो.

उसने पहले मेरे लंड को अपने हाथों से सहलाया और मेरे बॉल्स से खेलने लगी.

अहह मैं तो उसके स्पर्श से सातवें आसमान पर पहुंच गया.
फिर मैंने अपने लंड को उसके होंठों पर लगाया तो उसने अपना मुँह खोल दिया और मेरे गर्म गर्म लंड के टोपे को अपनी जीभ से चाटने लगी.

उसने दो तीन बार मेरे लंड के टोपे को ऊपर से नीचे तक अपनी गर्म गर्म जीभ से चाटा.

अब सिसकारियां लेने की बारी मेरी थी.

दोस्तो, मैं बता नहीं सकता कि कितना मज़ा आ रहा था, दिल कर रहा था कि वो ऐसे ही अपनी जीभ से मेरे लंड को चूसती रहे.

मैं उसके मम्मों को ऐसे ही अपने हाथों में पकड़ कर भींचता रहूं- अहह भाभीईईई और जोर से चूसो मेरे लंड को प्लीज़ … आंह खा जाओ मेरे लंड को … चबा जाओ.

अपने लंड को मैं धीरे धीरे उसके मुँह के अन्दर बाहर करने लगा और अपने दोनों हाथों से भाभी के मम्मों को वहिशयाना तरीके से मसल रहा था.

उसे भी जन्नत का मज़ा आ रहा था.

मैंने उससे कहा कि भाभी मेरे पूरे लंड को अपने मुँह में भर लो और जोर जोर से चूसो.

उसके सर को पकड़ा मैंने और कसके अपने लंड पे दबा दिया.
तभी निशा भाभी ने मेरे दोनों हिप्स को बहुत सख्ती से पकड़ा और अपने मुँह की तरफ खींचने लगी जैसे वो मेरे लंड को पूरा खा जाना चाहती हो.

मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और ताबड़तोड़ उसके मुँह को अपने लंड से चोदने लगा.

‘आहह आहह ओह ओह आईई भाभी मेरा निकलने वाला है … कहां निकालूं!’

उसने एक बार मेरे लंड को अपने मुँह से निकाला और कहा- मैं तुम्हारा रस पीना चाहती हूँ, प्लीज़ मेरे मुँह में रस छोड़ दो.

यह कहते हुए उसने दोबारा मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया और पागलों की तरह लंड चूसने लगी. बड़ी तेज़ी से अपने मुँह को मेरे लंड पर आगे पीछे करने लगी.

‘आआह्ह्ह ओह …’

मैंने भी अपने झटकों की स्पीड बढ़ाई और राजधानी एक्सप्रेस के तरह घचाघच घचाघच धक्के लगाने लगा.

अचानक से मेरे लंड से एक पिचकारी छूटी और सीधा उसके गले में जा लगी.
वो रुक गई और मेरे लंड से निकलने वाले रस को पीने लगी.

मेरा पूरा रस निकलने के बाद उसने बड़े प्यार से मेरे लंड को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ कर दिया.

दोस्तो एक अनजान भाभी से ट्रेन में लंड चुसवा कर सकिंग सेक्स में बहुत मज़ा आया.
उस भाभी के चेहरे पर भी एक संतुष्टि भरी स्माइल थी और यह देख कर मैं भी मुस्करा दिया.

इसके बाद मैंने उसकी नजरों में नजरें डाल दीं और चुदाई के लिए पूछा.

वह मुस्कुरा दी.

दोस्तो, निशा भाभी के साथ ट्रेन में लंड चुसाई के बाद उसकी चुत चुदाई की कहानी के लिए आपको थोड़ा सा इंतजार करना पड़ेगा.

अभी आपसे बस इतनी सी इल्तजा है कि यदि आपको मेरी लंड सकिंग सेक्स स्टोरी पसंद आई हो, तो प्लीज मेल करके मेरा हौसला जरूर बढ़ाएं.
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