चढ़ती जवानी में सेक्स की चाह-6

गांड चुदाई Xxx कहानी में पढ़ें कि कैसे मेरे पापा के दोस्त मुझे चोदना चाहते थे. मैं भी अंकल के लंड का मजा लेना चाहती थी. जब अंकल ने मेरे साथ शरारत की तो मैंने उनका साथ दिया.

फ्रेंड्स, मैं आपकी रंगीली पूनम पांडेय एक बार फिर से चुदाई कहानी का मजा देने के लिए हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
मंगते बाबा को फंसा कर दो लंड लिए
में आपने अब तक पढ़ा था कि वो दोनों बाबा मिल कर मेरी फुद्दी मार रहे थे.
एक मुझे चोद चुका था और अब दूसरा चोद रहा था.

तभी पहले वाले बाबा का लंड फिर से खड़ा हो गया और उसने मेरी गांड का रुख कर लिया.

अब आगे Gand Chudai Xxx Kahani:

उस दूसरे बाबा ने मेरी गांड के छेद में खूब सारा थूक भर दिया और अपना लंड का टोपा मेरी गांड के छेद पर रख दिया.
अभी मैं कुछ समझ पाती कि उस हरामी बाबा ने एक ज़ोर का झटका दे मारा. जिससे मेरी चीख निकल गयी.

नीचे उस चूत चोदने वाले बाबा ने मेरे बालों को खींचते हुए मेरा मुँह अपने मुँह में घुसा लिया और मेरी आवाज दबाते हुए मुझे चूमने लगा.
पीछे से लगा दूसरा बाबा मेरी गांड में लंड लगाए फायर करने को तैयार था.

उस बाबा ने मेरी दोनों चूचियों को हाथ में पकड़ा और मसलने लगा.
इससे कुछ देर में मेरा दर्द कुछ कम हुआ और मैं शांत हो गई.

उसी वक्त बाबा ने मौक़ा देखा और तुरंत ही लगातार कुछ बहुत तेज़ झटके दे मारे, जिससे उसका लौड़ा मेरी गांड चीरते हुए अन्दर पक की आवाज़ से घुस गया.

अब वो मुझे पीछे से चोद रहा था और आगे से मैं अपनी चूत भी चुदवा रही थी.
मतलब मेरी सैंडविच चुदाई हो रही थी.

काफी देर तक पूरे कमरे में मेरी कामुक सिसकारियां गूँजती रहीं ‘उफ्फ्फ आह उफ़्फ़ आह आह मर गई आंह चोदो और तेज़ अह …’

कमरे में दोनों के लंड भट भट की आवाज करते हुए मेरी चूत गांड फाड़ते रहे.

इसी तरह आधा घंटा चोदने के बाद दोनों ने मुझे करवट के बल लिटा दिया और अपनी जगह बदल ली.
मतलब चूत मारने वाला लंड अब मेरी गांड में घुस गया और गांड मारने वाला मेरी चूत मारने में लग गया.

मैं रंडियों की तरह अपने दोनों छेदों में दो लंड लिए हुए कामुक सिसकारियों से चुदती रही.

काफी देर तक मुझे चोदने के बाद उन दोनों ने ज़ोरदार पिचकारियों के साथ मेरे दोनों छेदों में अपना लावा निकाल दिया.

उन दोनों का लावा मुझे अपने दोनों छेदों में बहुत गर्म गर्म महसूस हुआ.

अब वो दोनों निढाल होकर सीधे लेट गए थे.
मैं किसी तरह उनके लंड पकड़ कर उठी.

अब मुझसे चला भी नहीं जा रहा था क्योंकि मेरी चूत और गांड में दर्द और जलन बड़ी तेज़ हो रही थी.

किसी तरह से मैं बाथरूम में गयी और कमोड पर बैठ कर मैंने बड़ी मुश्किल से मूता.

मैं फिर से कमरे में गयी और समय देखा तो अभी 2 बजे थे.
तभी एक बाबा ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरा चुम्मा लेते हुए अपने मुँह से एक दवा की गोली मेरे मुँह में डाल दी.

मैं अचकचा गई.
उसने झट से कहा- इसको खा लो, इससे बच्चा नहीं होगा.
मैंने वो गोली खा ली.

उसके बाद मैंने फिर से चूस चूस कर दोनों बाबाओं का लौड़ा खड़ा किया और अब एक बाबा 69 पोजीशन में आ गया.
जबकि दूसरा बाबा लेट कर मेरे पीछे से मेरी गांड मारने लगा.

कुछ देर के बाद दोनों बाबाओं ने अदल बदल कर मुझे यानि अपनी बीवी को रात भर चोदा और हम तीनों करीब सुबह 4 बजे सो पाए.

सुबह करीब 11 बजे मेरा फ़ोन बज रहा था जिस वजह से मेरी आंख खुली.
देखा तो मेरी मम्मी का फ़ोन था.
उनसे मेरी कुछ देर बात हुई.

तब तक एक बाबा भी जग गया था.

उसके बाद उसने मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे मुँह में मुँह घुसा कर मुझे चूमने लगा.
उसका लौड़ा सुबह के समय किसी खम्बे की तरह एकदम टाइट था जिसको मैं अपने हाथों में लेकर हिलाने लगी.

उसने मेरे पूरे शरीर को चूमते हुए मुझे अपना लंड चुसाया और मुझे घोड़ी बना कर सुबह की शुरूआत चुदाई से कर दी.

जब वो मुझे घोड़ी बना कर चोद रहा था, तब मेरे मुँह के सामने दूसरे बाबा का लंड दिख रहा था.
उसको मैंने गप से अपने मुँह में पूरा भर लिया क्योंकि अभी वो बाबा सो रहा था.
उसी की तरह उसका लौड़ा भी अभी सो रहा था.

अभी कुछ ही देर बीती थी कि मेरी सिसकारियों की आवाज़ से सोये हुए बाबा जी और उनका लौड़ा, दोनों जाग गए.

उस दूसरे वाले बाबा ने मुझे लंड चुसाने के बाद चूमा और मेरी हवा में झूलती चूचियों को मसलने लगा.

पीछे से चूत चोदने वाले बाबा ने मुझे नीचे खींच कर ज़मीन में खड़ा कर दिया और मेरी एक टांग उठा कर मुझे पीठ से अपनी तरफ करके मेरी गांड में अपना लंड पेल दिया.

इसके बाद वो दूसरा वाला बाबा मेरे सामने से आ गया और मेरी चूत में अपना लंड घुसा कर मेरी चूत चोदने लगा. वो मेरी चूचियों को चूसते मसलते हुए मुझे आगे से चोदने लगा.

फिर मुझे ज़मीन में झुका कर कुतिया बना दिया.
उन दोनों बाबाओं ने काफी आसनों में सुबह से दोपहर एक बजे तक ने मुझे खूब ज़बरदस्त चोदा.

चुदाई के बाद हम तीनों को खूब जोरों की भूख लगी थी तो एक बाबा ने हम सबके लिए खाना बनाया.

खाना खाने के बाद हमने कुछ देर आराम किया.

फिर शाम होते होते एक राउंड चुदाई का और लगा.
दोनों बाबा ने मेरी जबरदस्त ठुकाई की.

फिर रात में दारू पीने और खाना खाने के बाद उन दोनों ने शायद दवा खा ली थी.
दवा के असर से उन दोनों ने पूरी रात मेरी चुदाई की.

इसी तरह अगले दिन भी दोपहर में दोनों ने मुझे नहाते हुए चोदा.
फिर तीसरे और आखिरी दिन मुझे फिर से तैयार होने को बोला.
लगभग हर रोज़ की तरह इस दिन भी मैं शाम 7 बजे तक खूब दबा कर चुदी और उनसे विदा लेने का समय आ गया.

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फिर वो दोनों मेरा फोन नंबर लेकर जाने लगे.
जाने से पहले मैंने भी उनका नंबर ले लिया.

जाते समय एक बाबा ने मुझसे कहा- कभी इसी तरह अगर मौका मिले, तो मिलने को बुला लेना.
मैंने वादा कर दिया और वो दोनों चले गए.

उनके शाम को जाने के बाद मैं बाथरूम में घुस गई और आधा घंटा गर्म पानी से नहाकर अपनी भोसड़ी और गांड को कुछ आराम दिया.

मैंने बाथरूम के शीशे में देखा कि मेरी गांड और चूची दोनों के आकार में कुछ बढ़ोत्तरी हो गयी थी.

उसी दिन 9 बजे रात को मेरे घर वाले आ गए.

जिसके बाद खाना हुआ और खाने के बाद मैं जल्दी सो गई.

अगले दिन सबका फिर से वही पुराना रूटीन हो गया.
पापा काम पर गए और मम्मी अपने स्कूल चली गईं.
भाई अपने स्कूल निकल गया.

उन सभी के जाने के बाद आज दिन भर मैं घर पर बिना चुदे रही.

शाम को जब मेरा भाई घर आया तो आज वो कुछ परेशान सा लग रहा था.
मैंने उससे बहुत कोशिश की और कारण जानना चाहा, लेकिन उसने कुछ नहीं बताया.

फिर मैंने रोहण से फोन से पूछा, तो उसने आधी बात बताई कि मेरे भाई को स्कूल से निकाल दिया गया है. जिसका कारण रोहण को भी नहीं मालूम था.

मैंने अपने भाई के पास जाकर उसको जब सब बताया और मम्मी पापा को बताने की धमकी दी.
तो उसने बताया कि उसने आज स्कूल से गोला मारा था. जिसको उसके क्लास टीचर ने देख लिया था और उसको अपने पेरेंट्स को बुलाने को बोला था.

लेकिन गनीमत ये रही थी कि उसके टीचर ने अभी प्रिंसिपल से नहीं बोला था और बात ज़्यादा उठी नहीं थी जिस वजह से अभी मेरे भाई का नाम नहीं कटा था.
उसके टीचर बार बार पेरेंट्स को बताने के लिए बुला रहे थे लेकिन अगर पापा को पता चलता तो वो भाई को खूब मारते और शायद इसी डर से उसने घर पर कुछ नहीं बोला.

भाई ने मुझे भी इसी वादे पर पूरी बात बताई कि घर पर किसी को मत बोलना.
उसने मुझसे वादा भी किया कि अब आगे से ऐसा कुछ नहीं होगा.

इसके बाद मैंने अपने भाई से उसके टीचर का नंबर लिया और रोहण से उसके टीचर के बारे में पूछा.

रोहण बोला- आप तो उससे बात करना ही मत दीदी या उसके पास जाना भी मत. सिर्फ अपने पापा को भेजना वरना वो बहुत हरामी टीचर है. वो हमेशा स्कूल की लड़कियों से छेड़खानी करता है और डर की वजह से उससे कोई कुछ नहीं बोलता है.

उसने आगे बताया कि उसकी बीवी मर गयी है, वो यहीं किराये के मकान में रहता है. पहले भी उसने इसी तरह से एक लड़के की मजबूरी का फायदा उठा कर उसकी गांड मारी थी. वो अभी भी उस लड़के की गांड स्कूल और अपने घर बुला कर मारता है.

मुझे अच्छे से समझ में आ गया था कि मुझसे ही इस टीचर से काम हो जाएगा. क्योंकि ये ज़रूरत से ज़्यादा चुदाई का भूखा है. जब लड़के की गांड मार सकता है, तो मुझे तो ये पक्का चोदना चाहेगा. इससे मेरा काम बड़ी आसानी से बिना किसी के मालूम चले हो जाएगा.

मैंने रोहण से कहा- मुझे तुम मिल कर पूरी बात बताओ.
वो बोला- दीदी कमरे में बुला लो. सारी रात में पूरी बात समझा दूंगा.

मैं समझ गई कि आज रात रोहण मुझे चोदने की बात कह रहा है.
मैंने हामी भर दी.

रात को रोहण दूसरे रास्ते से मेरे कमरे में 11 बजे आ गया और उसने रात भर मुझे चोदा.
सुबह वो चला गया और सब घर वाले चले गए और मेरा भाई भी दोस्त के मम्मी पापा को देखने के लिए सुबह घर से निकल गया.

उस दिन राजेश अंकल मेरे घर आ गए.

मैं नहा कर रोज की तरफ आज भी अपने घर में नंगी थी.

लेकिन जब वो आए तो मैंने तौलिया बांध लिया.
उसके बाद जब अंकल घर के अन्दर आए, उन्होंने मुझे मेरी नंगी बांह पकड़ कर मुझे उठा कर सामने खड़ा कर लिया.

उन्होंने मुझे अपने गले से लगा लिया जिससे मेरी चूचियों की नोकें उनके सीने में जा घुसीं.

अंकल मेरी पीठ सहलाते हुए मुझे दबा कर मेरे मम्मों का मजा लेने लगे.
फिर वो अन्दर आकर बैठे और कुछ देर की बात होने के बाद उन्होंने बोला- बेटा चाय पिला दो, उस दिन तुम्हारे हाथ की चाय बड़ी अच्छी लगी थी.

मैं रसोई में चाय बनाने चली गयी.
तभी पीछे से राजेश अंकल भी किचन में आ गए.

वो एकदम मुझसे सट कर ये बात कर रहे थे- बताओ मेरे बेटे से शादी करोगी या नहीं?
मैं हंस दी.

फिर अंकल बोले- चाय में दूध कौन सा डालती हो, बड़ा मस्त स्वाद आता है.
इसी बीच मैंने चाय में एक खौल लगाया और अंकल से कहा- आप इसको चखो, ठीक बनी है या नहीं.

मैंने उनको सामने से मौका दिया था, तो वो पीछे से ही मुझसे एकदम चिपक कर खड़े हो गए.
और उनका लंड जो पहले से खड़ा था, मेरी गांड में घुसने लगा.

मैंने भी अपनी गांड पीछे को की और अंकल के लंड का अहसास करने लगी.

चाय ठंडी करके मैंने अपनी हथेली पर रखी और अंकल की तरफ हथेली कर दी.
अंकल ने मेरे हाथों को चाट कर कहा- वाह क्या मस्त चाय है.

फिर उन्होंने अपने हाथों को मेरे पेट पर बांध लिया, जिससे उनका लंड और मुझे ज्यादा गड़ने लगा.
मैंने अंकल से थोड़ा हट कर कप उठाया तो अंकल ने धीरे से कहा- थोड़ा और खौलाओ न!

मैंने उनका इशारा समझ लिया था.
मैं बोली- ओके अंकल, अभी पूरा खौला देती हूँ.

मैं फिर से अपनी जगह पर आ गई और अंकल भी मुझसे चिपक गए.

अबकी बार जब वो मेरे पीछे चिपके तो उन्होंने अपना लंड पैंट से निकाल लिया था.
उन्होंने अपने लंड पर थूक लगा कर चिकना भी कर लिया था.

फिर अंकल ने मेरी गांड के छेद पर लंड रख दिया और उन्होंने खुद को मुझ पर हल्का सा दबा दिया.
उसी पल मैंने अपनी टांगें खोल दीं और सटाक से उनका लंड मेरी Xxx गांड में चला गया.

लंड गांड के अन्दर लेते ही मेरी एक ज़ोर की कामुक आह निकल गयी.
मैंने नाटक करते हुए अंकल से कहा- ये क्या कर रहे हो आप … इसको बाहर निकालो … अंकल ये सब गलत है.

उन्होंने अपने दोनों हाथों को मेरी चूचियों पर रखा और उनको दबाने लगे.
वो मेरी गांड में पीछे से ज़ोर ज़ोर से फट फट की आवाज़ से मेरी गांड मारने लगे.

अंकल बोले- बेटा मैं तुमको काफी दिन से चोदना चाहता था, तुम बड़ी गजब की माल हो. बस एक बार मान जाओ.
बस इतना बोलते हुए वो मुझे भकाभक चोदने लगे थे.

दोस्तो, मेरे पापा के ख़ास दोस्त राजेश अंकल से मेरी चुदाई की शुरुआत किचन से ही हो चुकी थी.
ये चुदाई कहां तक जाती और क्या उनके बेटे के साथ मेरी शादी होती.
ये सब मैं आपको अपनी गांड चुदाई Xxx कहानी के अगले भाग में लिखूँगी. आपके मेल मुझे प्रोत्साहित करते हैं. प्लीज़ मेल करना न भूलें.
आपकी पूनम पांडेय.
[email protected]

गांड चुदाई Xxx कहानी का अगला भाग: मास्टर सेक्स कहानी

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